Sunday, February 5, 2012

Ummid

जाने कब मेरे सपनो में मेरी नज़र लग जाती है,
आते आते ख़ुशी फिर धुंध में खो जाती है !
डर लगता है अब एक झपकी लेने में भी,
क्यूंकि आँखें बंद होते ही फिर कोई उम्मीद सपना बन जाती है !!
© Ankita Jain

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